पायलट बनना चाहती है लोहार की बेटी, पिता ने दिलाया स्कूल में एडमिशन (Dainik Bhaskar)

She want to be pilot inspiring (PP)
कानपुर. उम्र भले ही छोटी है, लेकिन ख्वाहिश खुले आसमान में परिदों की तरह उड़ान भरने की है। राहों में कांटे बिछे हैं, लेकिन हौसला झुकने को तैयार नहीं है। मुश्किलों की चादर में लिपटी छोटे से दिल की ये बड़ी आरजू रोज अपने ‘पर’ फैला रही है। कानपुर देहात के झींझक कस्बे में एक लोहा पिटवा (लोहार) की बेटी के बुलंद इरादे इसी ओर इशारा करते हैं कि भले ही शाम सूरज को कितना भी छिपा ले, रात को एक दिन ढलना ही है। गर्म लोहे पर हथौड़े की चोट करते-करते एक पिता का दिल बेटी के स्कूल जाने की तमन्ना सुनकर पिघल गया। उसकी आंखों में ये ख्वाब पीएम मोदी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने जगाया है।
देश में आज भी लोहा पिटवा एक ऐसी जाति है, जिनके लिए जिंदगी का हर रंग बेरंग है। इनके हालात इन्हें ख्वाब देखने की इजाजत नहीं देते। गरीबी की गोद में जिंदगी शुरू होती है और मेहनत की भट्ठी में तपते-तपते कब खत्म हो जाती है, खुद उन्हें पता नहीं चलता। खुला आसमान ही इनका घर है और दो वक्त की रोटी इनकी जिंदगी है। इन लोगों ने स्कूल का नाम तो सुना है, बाहर से देखा भी है, लेकिन कभी कोई पढ़ने नहीं गया। ऐसे में जब इनकी जाति के रमेश ने अपनी दस साल की बेटी को पढ़ाने की ठानी तो सब हैरान रह गए। Continue Reading
Source: Dainik Bhaskar
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