Beautiful Hindi Shayari / Poetry shared on Social Media by Shailesh Lodha of Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah

Beautiful Hindi Shayari Poetry of Shailesh Lodha He plays Taarak Mehta in Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah

जो भी करता है वो आसमां करता है, रोशन इस जंहा को ये झिलमिल नहीं करती

ये तसल्ली है बुत से बात करने में, वो जैसा भीतर होता है वैसा बाहर

कमाल का है वो वक़्त, जब एहसास ही न हो कि सुबह है या शाम

आसमान वाले ने इंसान असली बनाये, इंसान को देखिये, आसमान ही नकली बना डाला

ग़म जब भी आये दिल के दरवाज़े खटखटाके , हो के शर्मिंदा पलट जाये, ऐसे लगाओ ठहाके

ज़ुबाँ को ज़हमत देने की ज़रूरत क्या,एक मुस्कान ही बहुत है ज़माने के लिए

वो जो देखते हैं इधर उधर, ज़रा खुद को भी देख लें

खुदा से हमारा रिश्ता भी चश्मे और निगाह सा है, वो जब साथ होता है सब कुछ साफ़ नज़र आता है

आँखें भी मुस्कुराती है, ज़िम्मेदारी सिर्फ होंठो की थोड़े ही है

हमारे मुल्क की खासियत, हर वक़्त, चाय का वक़्त

सूखे पत्ते बिखरने लगें हैं अरमानों की तरह, मौसम फिर बदल गया , इंसानों की तरह

सा दृश्य दृष्टि में था तो मन गुनगुना उठा, कुदरत की इस पवित्रता को तुम निहार लो, इस के गुणों को अपने मन में तुम उतार लो, चमका लो आज लालिमा अपने ललाट की, कण कण से झांकती हुई छवि विराट की, अपनी तो आँख एक है, उस की हज़ार है, ये कौन चित्रकार है

आसमान अनुपम , समंदर मौन, प्रकृति तुम से खूबसूरत कौन

आँखों में थकन है तो क्या, क़दमों को रुकने की आदत नहीं

कुछ न कह कर भी कहना कमाल है, मुस्कान होंठों पर आँखों में सवाल है

खफा होने में क्या रखा है, ज़रा हर शिकन मिटाने तो आ, चुटकी भर ही सही, रंग लगाने तो आ

हंसी हर पल संग हो, संतुष्टि के रंग हो, भरी खुशियों से जीवन की झोली हो, ऐसी ही होली हो

Source: As shared by him on Social Media


Small Request: Dear Reader, hope you liked our content on Motivation. We want to keep our content free, engaging & effective to change lives. In order to survive and to create more content we need ‘Financial Help’. We value every single penny you pay us. Without your support we can't achieve our dream to turn 'Motivation into Utility'. Can you please help us using this link.
SHARE