Beautiful, Inspiring Poetry on Father, in Hindi

Inspiring father poetry

मम्मी डाँट रहीं थी तो कोई चुपके से हँसा रहा था,
वो थे पापा. . ..

जब मैं सो रहा था तब कोई चुपके से सिर पर हाथ फिरा रहा था ,
वो थे पापा. . .

जब मैं सुबह उठा तो कोई बहुत थक कर भी काम पर जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

खुद कड़ी धूप में रह कर कोई मुझे ए.सी. में सुला रहा था ,
वो थे पापा. . ..

सपने तो मेरे थे पर उन्हें पूरा करने का रास्ता कोई और बताऐ जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

मैं तो सिर्फ अपनी खुशियों में हँसता हूँ, पर मेरी हँसी देख कर कोई अपने गम भुलाऐ जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

फल खाने की ज्यादा जरूरत तो उन्हें थी, पर कोई मुझे सेब खिलाए जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

खुश तो मुझे होना चाहिए कि वो मुझे मिले , पर मेरे जन्म लेने की खुशी कोई और मनाए जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

ये दुनिया पैसों से चलती है पर कोई सिर्फ मेरे लिए पैसे कमाए जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

घर में सब अपना प्यार दिखाते हैं पर कोई बिना दिखाऐ भी इतना प्यार किए जा रहा था ,
वो थे पापा. . .

पेड़ तो अपना फल खा नही सकते इसलिए हमें देते हैं…पर कोई अपना पेट खाली रखकर भी मेरा
पेट भरे जा रहा था , वो थे पापा. . .

मैं तो नौकरी के लिए घर से बाहर जाने पर दुखी था पर मुझसे भी अधिक आंसू कोई और
बहाए जा रहा था , वो थे पापा. . .

मैं अपने “बेटा ” शब्द को सार्थक बना सका या नही.. पता नहीं… पर कोई बिना स्वार्थ के अपने “पिता”
शब्द को सार्थक बनाए जा रहा था , वो थे पापा. . .

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