Famous Filmy Dialogues of Gangs of Wasseypur -1

Famous-Filmy-Dialogues-of-Gangs-of-Wasseypur

ग़रीबी तोड़ देती है जो रिश्ते खाक होते है और पराए अपने होते है जब पैसे पास होते है

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ज़रा सूंघ के बताओ मंत्रीजी नाश्ता में का खाए है

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इंसान जो है बस दो नसल के होते है एक होते है हरामी और दूसरे बेवकूफ़

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बड़े लोग अपना नाम भूल जाते थे लेकिन अपनी ज़मीन अपना समान नही

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आड़ चाहे जितना बड़ा हो जाए लाद के नीचे ही रहता है

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इतना गोली मारते की आपका ड्राइवर भी खाली खोका बेच बेचकर राईस बन जाता

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खाना खाओ, ताक़त आएगा बाहर जाके बेइज़्ज़ती मत करना

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ना कोई किसी का रक़ीब होता है ना कोई किसी का हबीब होता है खुदा की रहमत से बन जाते है रिश्ते, जहाँ जिसका नसीब होता है

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यहाँ कबूतर भी एक पंख से उड़ता है और दूसरे से अपना इज़्ज़त बचाता है

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