Motivational Hindi Poetry on Father & Daughters: कन्यादान

Motivational Hindi Poetry on Father & Daughters कन्यादान

जाओ , मैं नहीं मानता इसे ,

क्योंकि मेरी बेटी कोई चीज़ नहीं ,

जिसको दान में दे दूँ ;

मैं बांधता हूँ बेटी तुम्हें एक पवित्र बंधन में ,

पति के साथ मिलकर निभाना तुम ,

मैं तुम्हें अलविदा नहीं कह रहा ,

आज से तुम्हारे दो घर , जब जी चाहे आना तुम ,

जहाँ जा रही हो , खूब प्यार बरसाना तुम ,

सब को अपना बनाना तुम ,

पर कभी भी , न मर मर के जीना ,

न जी जी के मरना तुम ,

तुम अन्नपूर्णा , शक्ति , रति सब तुम , ज़िंदगी को भरपूर जीना तुम ,

न तुम बेचारी , न अबला , खुद को असहाय कभी न समझना तुम ,

मैं दान नहीं कर रहा तुम्हें ,

मोहब्बत के एक और बंधन में बाँध रहा हूँ ,

उसे बखूबी निभाना तुम ……………..

– एक सोच एक पहल

Source: Social Media


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